जावद (नीमच), 25 मई 2026: रीवा में 20 मई को दिगंबर जैन समाज की दो पूज्य आर्यिका माताजी (105 श्रुत मति माताजी और 105 उपशम मति माताजी) की कार से कुचलकर हुई प्राणघातक हमला के विरोध में आज जावद का सकल जैन समाज सड़क पर उतरा। घटना को ''सुनियोजित हत्या की साजिश'' बताते हुए समाज ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। सोमवार की सुबह जावद में ऐतिहासिक एकजुटता दर्शन देखने को मिला, जहां जैन समाज के आसपास के संप्रदायों ने सामूहिक रूप से एक विशाल मौन रैली निकाली।
श्री पार्श्वनाथ मंदिर से बस स्टैंड तक मौन रैली
सोमवार सुबह 9:30 बजे सैकड़ों की संख्या में समाजजन श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर एकत्रित हुए। यहां से मौन रैली शुरू हुई, जो शहर के प्रमुख रेस्तरां- कसेरा बाजार, कंठाल चौक, और लक्ष्मीनाथ चौक से होते हुए बस स्टैंड प्रतीक्षालय के बाहर तक पहुंच गई। समाज के निर्देशों और संप्रदायों को देखते हुए तहसीलदार साहब खुद मौके पर पहुंचे, जहां सड़क पर ही उपदेश का वाचन कर उन्हें महामहिम राष्ट्रपति के नाम का 5-सूत्र में ज्ञापन सौंपा।
चारों ओर जैन संप्रदायों की ऐतिहासिक एकता
यह विरोध प्रदर्शन जैन समाज की एकजुटता का सबसे बड़ा विरोध है। स्पष्टतया अंतिम समय चारों ओर समाज के अध्यक्ष एवं सैकड़ों समाजजन एक साथ उपस्थित रहे:
कैलाश चन्द्र जैन (अध्यक्ष, दिगम्बर जैन समाज)
राजेंद्र गोयल (अध्यक्ष, श्वेतांबर तारापंथी सभा)
अनिल जैन (अध्यक्ष, श्वेताम्बर मूर्ति पूजक संघ)
अजित कैथेड (अध्यक्ष, साधुमार्गी जैन संघ)
स्पष्टीकरण की 5 प्रमुख मांगें:
1. उच्च स्तरीय जांच:
एसआईटी नहीं, सीबीआई या जांच हो। घटना के सभी सीसीटीवी, मोबाइल वीडियो और डिजिटल प्रतीक तुरंत जब्त हो जाएं। षडयंत्र निकला तो धारा 302 यानी हत्या का केस चला।
2. संत सुरक्षा ऐप्लीकेशन लागू हो:
विहार विहार पर प्रशासनिक सहयोग हो। शेष क्षेत्र में *पुलिस एस्कॉर्ट मिले। राजमार्ग और पहाड़ी इलाकों वाले क्षेत्र में ट्रैफिक, चेतावनी बोर्ड और स्पीड ब्रेकर अनिवार्य है।
3. राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बने:
केंद्र सरकार ने सभी संतों के लिए पैदल यात्रा करने वाले राष्ट्रीय पासपोर्ट और एसओपी बनाए। निजीकरण के लिए विशेष बजट और प्रस्ताव माननीय।
4. संतों पर हमलों को "आतंकी कृत्य" माना जाए
कारण: _साधु-संत आत्मरक्षा नहीं करते, वाहन-सुरक्षा साधन नहीं करते, पूर्ण अहिंसा जीवन जीते हैं। इन पर हमलों को विशेष सलाह श्रेणी में फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई हो।
5. जिला स्तर पर "संत सुरक्षा कक्ष" बने:
मजिस्ट्रेट-एसपी की प्रत्यक्ष निगरानी में 24x7 नामांकन चले। शनिवार को 5 मिनट में पुलिस रिस्पांस मिले।
"यह घटना केवल सड़क दुर्घटना भर नहीं मानी जा सकती। समाज में गहरे खतरे पर उपलब्ध साक्ष्य और वीडियो क्लिप्स के आधार पर यह सु नियोजित कार्य है। जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसा एवं पैदल यात्रा करने वाले तपस्वी होते हैं।"
"ज्ञापन प्राप्त कर लिया गया है। मामला अत्यंत संवेदनशील है। इसे स्थायी राष्ट्रपति सचिवालय और जिला प्रशासन को भेजा जा रहा है। जावद क्षेत्र में विहार करने वाले संतों को आज से ही पुलिस सुरक्षा दी जाएगी।"
जावद तहसीलदार (नवीन गर्ग)
7 दिन का अंतिम दिन: दिल्ली तक पदयात्रा की चेतावनी
सकल जैन समाज ने प्रशासन को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि उनका उद्देश्य तनाव पैदा करना नहीं बल्कि न्याय पाना है। अगर अगले 7 दिनों में इस मामले की सीबीआई जांच शुरू नहीं हुई तो जावद से लेकर दिल्ली तक पदयात्रा की जाएगी।