विशेष संवाददाता, [राहुल सिसोदिया]
नीमच /जवाद। मध्य प्रदेश में पटवारियों की ट्रांसफर नीति एक बार फिर सवालों के घेरे में है। हाल ही में जिले के भीतर 30 पटवारियों की तबादला सूची जारी की गई है, लेकिन इस सूची के सामने आते ही प्रशासनिक पारदर्शिता और दावों की पोल खुल गई है। आरोप लग रहे हैं कि ट्रांसफर में नियमों का पालन करने के बजाय चहेतों को उपकृत किया गया है।
नियमों की धज्जियां, गृह तहसील में सालों से जमावड़ा
शासकीय नियमों के अनुसार, जिले के भीतर पटवारियों की पदस्थापना का अंतिम अधिकार जिला कलेक्टर के पास होता है। पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार का स्पष्ट नियम है कि किसी भी पटवारी को उसकी गृह तहसील (होम तहसील) में पदस्थ नहीं किया जाएगा।
लेकिन इस 30 पटवारियों की सूची और वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था को देखें, तो धरातल पर हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। जिले में ऐसे कई पटवारी हैं, जो लंबे समय से अपने गृह जिले या गृह तहसील में ही मलाईदार हलकों पर पैर जमाए बैठे हैं। इस नई सूची में भी उन्हें छुआ तक नहीं गया है।
जनता का तीखा सवाल, क्या भू-माफिया और रसूखदारों को मिल रहा है संरक्षण?
नियमों की इस खुली अनदेखी ने अब कई गंभीर संशयों को जन्म दे दिया है। क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और किसानों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर इन पटवारियों पर प्रशासन इतना मेहरबान क्यों है? लोग सीधे तौर पर सवाल उठा रहे हैं।
क्या इन पटवारियों को इलाके के रसूखदारों की अवैध जमीनों को कानूनी संरक्षण देने के लिए उनके गृह क्षेत्रों में बनाए रखा गया है?
क्या रसूखदारों द्वारा किए जा रहे अवैध कब्जों और सरकारी जमीनों की हेराफेरी को दबाने के लिए इन पटवारियों का ट्रांसफर नहीं किया जा रहा?
आखिर क्या वजह है कि कड़े प्रशासनिक निर्देशों के बावजूद इन विशेष पटवारियों पर ट्रांसफर की गाज नहीं गिरती?
नाम न छापने की शर्त पर एक स्थानीय किसान ने कहा: "नियम और कायदे सिर्फ उन छोटे कर्मचारियों के लिए हैं जिनकी कोई पहुंच नहीं है। जो रसूखदारों और रसूखदार नेताओं के करीबी हैं, वे सालों से एक ही तहसील में जमे रहकर जमीनों का खेल कर रहे हैं।"टी
उच्च स्तरीय जांच की मांग
30 पटवारियों की इस नई सूची के बाद अब सालों से एक ही जगह जमे पटवारियों की भूमिका पर उंगलियां उठने लगी हैं। स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग और विपक्षी गुटों ने मांग की है कि जिले के सभी पटवारियों के गृह क्षेत्र और उनकी वर्तमान पदस्थापना की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर इस गंभीर विसंगति का संज्ञान लेकर कोई ठोस कार्रवाई करते हैं या फिर रसूख के रसूखदार तंत्र के आगे नियम इसी तरह दम तोड़ते रहेंगे।