नीमच/चित्तौड़गढ़। राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर ने मेवाड़ विश्वविद्यालय को महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान करते हुए राज्य सरकार द्वारा जारी उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत विश्वविद्यालय में नए विद्यार्थियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया था।
न्यायमूर्ति मुकेश राजपुरोहित की अवकाशकालीन एकलपीठ ने मेवाड़ विश्वविद्यालय एवं मेवाड़ एजुकेशन सोसायटी द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी किया तथा न्यायालय ने दिनांक 1 जून 2026 के विवादित आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है।
विश्वविद्यालय की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया कि वर्ष 2025 में जारी कारण बताओ नोटिसों के जवाब समयबद्ध रूप से राज्य सरकार को प्रस्तुत कर दिए गए थे तथा उन पर विचार की प्रक्रिया अभी भी लंबित है। साथ ही, जांच प्रक्रिया भी अभी पूर्ण नहीं हुई है। इसके बावजूद नए प्रवेशों पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया था।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी यह स्वीकार किया गया कि विश्वविद्यालय द्वारा प्रस्तुत जवाबों पर विचार जारी है तथा जांच प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई है। न्यायालय ने मामले को विचारणीय मानते हुए विश्वविद्यालय को राहत प्रदान की।
मेवाड़ विश्वविद्यालय प्रबंधन ने कहा कि विश्वविद्यालय सदैव कानून एवं नियामकीय प्रावधानों का पालन करता रहा है और आगे भी करता रहेगा। विश्वविद्यालय ने विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को आश्वस्त किया है कि प्रवेश प्रक्रिया पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार जारी रहेगी ।