25 दिन बाद भी जारी रहा टैक्सटाइल फैक्ट्री का विरोध पढ़े पूरी खबर।

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राहुल सिसोदिया की रिपोर्ट

जवाद। जावद के समीन मोरवन में टेक्सटाइल का विरोध रहा जारी ।

मोरवन में खुलने वाली 350 करोड़ की टेक्सटाइल्स प्लांट का विरोध चरम सीमा पर है। जिस में 25 दिन से धरने पर बैठे किसान ,ग्रामीण।

वही ग्रामीणों का कहां हे कि टेक्सटाइल फैक्ट्री को मोरवन में न खोल कर कही ओर खोला जाए। जिस के विरोध में लगातार धरना प्रदर्शन जारी है। वही ग्रामीणों के द्वारा जब कलेक्टर ऑफिस में ज्ञापन देने के लिए हजारों की संख्या में किसान निकले तो प्रशासन के द्वारा जगह जगह पर उन्हें रोक गया।वही कलेक्टर ऑफिस से 5 से 7 किलोमीटर दूर पुलिस प्रशासन ने भारी बल के साथ उन्हें रोकने का प्रयास किया। अपने हक के लिए लड़ते किसान और ग्रामीण। विधायक ओम प्रकाश सखलेचा पर लगाए गंभीर आरोप। वही किसानों ,ग्रामीणों ने विधायक सखलेचा पर आरोप लगते हुआ कहा कि विधायक के मनमानी रवैया से ग्रामीणो,किसानों में आक्रोश का माहौल है। विधायक के तानाशाह शासन से लोग को बड़ी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। फिलहाल 25 दिन बाद भी धरना प्रदर्शन स्थल पर नहीं पहुंचे विधायक।

 

ये हे मुख्य कारण।  

 

* टेक्सटाइल्स फैक्ट्री को दी गई जमीन चारागाह की जमीन हे जोकि गायों, वह जानवरों की चरण की जमीन हे जिस में ग्रामीण, किसान अपने पशुओं को चराते है। वही इतनी बड़ी फैक्ट्री लगने से पहले ग्रामीण किसानों वह क्षेत्र वासियों से पूछना भी जरूरी नहीं समझा।

* टेक्सटाइल्स प्लांट से निकलने वाले केमिकल युक्त पानी।बता दे कि क्षेत्र वासियों के सिंचाई,वह पीने का पानी का एक मात्र स्त्रोत हे जिससे हज़ारों की संख्या में लोग उस पानी को पी रहे हैं। वही किसानों की खेती के सिंचाई के लिए भी इसी पानी का उपयोग करते हे। ऐसी स्थिति में जब फैक्ट्री से निकलने वाला केमिकल युक्त पानी जमीन में डाला जाए तो रिसाव के माध्यम से यह पानी डेम में मिल जाएगा जिसे डेम का पानी केमिकल युक्त हो जाए।जो कि स्वस्थ,वह फसलों के लिए बहुत हानिकारक हैं।

* टेक्सटाइल्स फैक्ट्री लेगी डेम का कुछ प्रतिशत पानी,

 जी है। यदि टेक्सटाइल फैक्ट्री डेम से पानी लेती है तो इसका सीधा असर किसानों वह ग्रामीणों पर पड़ेगा। क्योंकि मोरवन डेम आसपास के रहवासियों,किसानों ग्रामीणों के भी प्रर्याप्त नहीं पड़ता है। मोरवन डेम में 52 फिट पानी माता है। जिसमें किसानों की सिंचाई वह आसपास के ग्रामीण के पीने के लिए संरक्षित है। जिस पर यदि टेक्सटाइल फैक्ट्री को पानी दिया गया तो किसानों वह ग्रामीणों को मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है। बारिश कम होने की स्थिति में कई बार देखा जा सकता की पानी के लिए रहवासियों ,ग्रामीणों को कितनी मुसीबत का सामना करना पड़ता।

 

विधायक ओम प्रकाश सखलेचा पर लगे आरोप।

* शासकीय भूमि पर कब्जा करने के लगे आरोप!

* एक तहफ तो मोहन सरकार चारागाह की जमीन को खाली करने के आदेश देते हुए दिखाई देते है वही दूसरी तहफ विधायक पर चारागाह की जमीन को फैक्टरी को बेचते की बात सामने आ रही है!

* वही पुराण मल अहीर द्वारा विधायक पर 100 बिग से भी अधिक अवैध कब्जे की बात भी सामने आ रही है!

* तीखे तेवर पर निशाना कसते हुए फ्रीडम मोबाइल से जरिए विधायक और उन के बेटे पर करोड़ो की ठगी करने का भी लगाया आरोप!

* अपने स्वार्थ के लिए अपने निजी मिलने वालों पर हो रहे मेहरबान विधायक सखलेचा!

* युवाओं के रोज़गार के लिए जुटे दावे करने का भी लगा आरोप!

* टेक्सटाइल फैक्ट्री से आसपास की जमीन हो जाएगी बंजर!

 

क्या फैक्ट्री से मिलेगा स्थानीय युवाओं को रोजगार।  

जनप्रतिनिधि द्वारा बताया गया है कि फैक्ट्री लगने से युवाओं को रोजगार मिलेगा जिसमें 1000 युवाओं को रोजगार उनके कार्य कुशलता के आधार पर दिया जाएगा जिससे क्षेत्र का विकास होगा।जिसमे महिलाओं को भी रोजगार मिलेगा। फिलहाल यह तो वक्त बताएगा। पर विधायक सखलेचा ने जुटे वादे खोखले दावों के सिवा जनता को कुछ नहीं दिया।

 इससे पूर्वी धागा फैक्ट्री लगी थी जिसमें युवाओं को रोजगार देने की बात कही थी जो की धरातल पर शून्य है। वही जीने रोजगार दिया गया है उनकी 12 घंटे के सैलरी 7000 हजार रुपए बताई जा रही हे। जावद के समीप खोर विक्रम फैक्ट्री में भी स्थाई युवाओं को रोजगार नहीं मिलता है बाहरी यूवाओ को रोजगार मिलता है।यदि किसी व्यक्ति को रोजगार दिया भी जाता है तो जिनकी भूमि विक्रम फैक्ट्री द्वारा उपयोग में ली जाती है। या खरीदी जाती है।उन्हें ही रोजगार दिया जाता है।वही एशिया का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा प्लांट पर भी स्थाई युवाओं को ना के बराबर रोजगार मिला। जिसे यह तो साफ देखा जा सकता है। की ग्रामीणों वह नगर की जनता विधायक को खासा पसंद करते नहीं दिखाई दे रहे हैं। जिस का परिणाम विधानसभा के चुनाव में देखने को मिल सकता है।

 

इनका कहना है। 

ओमप्रकाश सकलेचा विधायक ने खोखले दावे झूठे वादों के अलावा कुछ नहीं दिया। मोरवन डैम के पानी को दूषित करने का प्रयास किया जा रहा है। जो हम होने नहीं देगे।

हम टेक्सटाइल फैक्ट्री का विरोध नहीं कर रहे हैं। ना ही रोजगार का विरोध कर रहे हैं। हम भी चाहते युवाओं को रोजगार मिले क्षेत्र का विकास हो। पर बस इतना कहना चाहते हे कि फैक्ट्री का स्थान परिवर्तन किया गया। वह डेम का पानी फैक्ट्री को नहीं दिया जाए। उस के लिया अलग से व्यवस्था की जाए।इसे पहले भी सीपीएस पद्धति का प्लांट आया जिसका किसी ने कोई विरोध नहीं किया क्योंकि वह सही है।1998 से फैक्ट्री लगी हुए हे कितने लोगों को रोजगार दिलाया। यह जनता को गुमराह किया जा रहा है। बस अपना काम निकाला जा रहा है।

पुराण मल अहीर

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