सिंगोली( निरंजन शर्मा)।शासन की संपत्ति पर नजर गड़ाए बैठे भू-माफियाओं और सिस्टम में बैठे उनके मददगारों को नीमच कलेक्टर ने कड़ा सबक सिखाया है। सिंगोली नगर परिषद के अंतर्गत आने वाली करोड़ों रुपये की बेशकीमती सरकारी भूमि को निजी मिल्कियत बनाने का खेल अब पूरी तरह उजागर हो चुका है। कलेक्टर न्यायालय ने तथ्यों को छिपाकर हासिल की गई निर्माण अनुमति और नामांतरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया है। मामला सिंगोली के नए बस स्टैंड स्थित सर्वे नंबर 439/1 की भूमि का है। जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिस भूमि पर केशरबाई पति महावीर कुमार ने वारिसान हक जताकर नामांतरण कराया, उसका असली सच फाइलों में दफन कर दिया गया था। दरअसल, महावीर कुमार जैन इस जमीन को लेकर सिविल न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट इंदौर तक अपनी दावेदारी हार चुके थे। इसके बावजूद, इन न्यायिक आदेशों को नगर परिषद के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया गया और प्रशासनिक तंत्र की आंखों में धूल झोंककर नामांतरण का प्रस्ताव क्रमांक 68 दिनांक 29.09.2023 को पारित करवा लिया गया। धारा 323 का प्रहार और तत्कालीन सीएमओ पर संकट- कलेक्टर ने मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 323 का उपयोग करते हुए इस पूरी प्रक्रिया को विधि विरुद्ध करार दिया है और 29 सितंबर 2023 को किया नामांतरण व 17 जनवरी 2024 को जारी की गई निर्माण अनुमति को निरस्त कर दिया है। इधर आदेश जारी होने के बाद मामले में तत्कालीन सीएमओ द्वारा बिना दस्तावेजों की जांच किए इतनी बड़ी अनुमति देना अब जांच के घेरे में है। सूत्र बताते हैं कि यदि भोपाल (नगरीय प्रशासन विभाग) से इस फैसले की पुष्टि होती है, तो तत्कालीन सीएमओ का निलंबन और उनके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई होना निश्चित है। फाइलों के खिलाड़ियों में हड़कंप- विधिक सलाहकार के स्पष्ट अभिमत के बाद अब यह साफ हो गया है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी हितों के साथ खिलवाड़ था। कलेक्टर के इस कड़े रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि गुमराह कर या तथ्य छुपाकर किए गए किसी भी अवैधानिक कार्य को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इनका कहना- कलेक्टर न्यायालय के फैसले की जानकारी मिली है। आदेश की प्रति मिलते ही उसका अध्ययन कर नियमों के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी। -खेमचंद मुसले, सीएमओ, नगर परिषद, सिंगोली