
नीमच। 28 जनवरी को महाविद्यालय में विकसित भारत विजन 2047- मूल्य आधारित अर्थव्यवस्था एवं चुनौतियां विषय पर राष्ट्रीय शोध सेमिनार आयोजित हुआ जिसमें उद्घाटन सत्र का शुभारंभ ज्ञान की देवी सरस्वती एवं विवेकानंद जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित कर किया गया। स्वागत उद्बोधन में महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. प्रशांत मिश्रा ने कहा कि युवा एवं महिलाए विकसित भारत का आधार है जिन्हें साथ लेकर चलना होगाको लेकर आग आएंगे तभी हमारा भारत विकसित होगा। आयोजन सचिव डॉ.आर. सी . जैन ने कार्यक्रम की रूपरेखा और उद्देश्यों पर विस्तृत रूप से प्रकाश डाला। जन भागीदारी प्रबंधन समिति के अध्यक्ष श्री विश्व देव जी शर्मा ने कहा कि नीमच में दान की परम्परा है और नीमच देने वाले जिलों के नाम से जाना जाता है। इन्होंने जिले के विकास के बारे में चर्चा करते हुए नीमच में बनने वाले रिंग रोड का भी जिक्र किया। मुख्य अतिथि के रूप मेंहै नीमच विधानसभा क्षेत्र के विधायक माननीय श्री दिलीप सिंह जी परिहार ने संबोधित करते हुए कहा कि सपने देखना हो तो खुली आंखों से देखो तभी सपने साकार होंगे। भारत को आगे कैसे लाया जाए इसके लिए हम सभी की भागीदारी सुनिश्चित करना होगी। आगे उन्होंने कहां की देश के प्राण गांवों में बसते हैं अतः गांव को समृद्ध बनाना होगा वहां लघु कुटीर उद्योग लगाना होगा तभी भारत विकास की ओर अग्रसर होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संकायाध्यक्ष अर्थशास्त्र, विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन डॉ एसके मिश्रा उन्होंने कहा कि वर्तमान समय भारतीय संस्कृति पुनर्जागरण का दौर है जहां हमेंअपनी संस्कृति, परम्परा,दर्शन आदि मूल्यों आदि की विरासत के साथ विकास करना होगा। डॉ मिश्रा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के महत्वपूर्ण पहलुओं की चर्चा करते हुए कहा कि दुनियां में भारत को महाशक्ति शिक्षा ही बनाएगी। शिक्षा, स्वास्थ में अधिक कार्य करने और भारत के डेमोग्राफिक डिविडेंड का योजना आधारित लाभ उठाने की आवश्यकता है। विशिष्ट अतिथि के रूप में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री श्री विनोद सिरोही ने युवाओं की भूमिका, स्वावलंबन, स्वरोजगार, स्टार्टअप और नई शिक्षा नीति में सुधार पर अपनी बात रखी । प्रथम मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. एस.के. भारल, विभागाध्यक्ष वाणिज्य अध्ययनशाला उज्जैन ने पीपीटी के माध्यम से कहा कि 2047 का यह दृष्टिकोण आर्थिक विकास के साथ-साथ एक ऐसे समाज निर्माण करना होगा जिससे समाज के सभी वर्गों की समान रूप से भागीदारी हो। विकसित भारत का लक्ष्य किसान कल्याण, महिला सशक्तीकरण, नवीनतम प्रौद्योगिकी का उपयोग, व्यापार क्षेत्र में वृद्धि, स्वच्छ और हरित पर्यावरण, विश्व स्तरीय शिक्षा, मितव्ययिता एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अच्छी स्वास्थ्य सेवा, पारदर्शिता एवं सुशासन आदि मूल्य भारत के विकास में महत्वपूर्ण भागीदारी निभाएंगे। द्वितीय मुख्य वक्ता के रूप में राजकीय स्नातकोत्तर मीरा गर्ल्स कॉलेज उदयपुर राजस्थान से सेवानिवृत प्राचार्य डॉ. शशी सांचीहर ने कहा कि समग्र शिक्षा अभियान ,जन औषधि केंद्रों से मुफ्त दवाओं का वितरण आदि का लाभ समाज के प्रत्येक व्यक्ति को इस मिलना चाहिए तभी सही मायनों भारत को विकसित भारत कह सकते हैं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संजय जोशी एवं डॉ. आयरिस रामनानी ने किया। आभार आयोजन सचिव डॉ.सी.पी. पंवार ने माना। उद्घाटन सत्र के पश्चात सेमिनार के प्रथम तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर डी एल अहीर ,सेवानिवृत प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय जावद द्वारा की गई एवं विषय विशेषज्ञ के रूप में डॉक्टर आशुतोष व्यास ,प्राचार्य राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ,निंबाहेडा राजस्थान रहे। द्वितीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉक्टर संजय जोशी विभागाध्यक्ष समाजशास्त्र, के द्वारा की गई व विषय विशेषज्ञ के रूप मे डॉ पी सी रांका प्राध्यापक अर्थशास्त्र ,शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय नीमच मंचासीन रहे । तकनीकी सत्रों में डॉ जाकिर हुसैन वोहरा, प्राध्यापक वाणिज्य, रामपुरा महाविद्यालय,डॉ विवेक नागर , प्राचार्य,ज्ञानमंदिर विधि महाविद्यालय नीमच,प्रो आभा मेघवाल, सहायक प्राध्यापक अंग्रेजी,श्रीमती सुजाता शोधार्थी , एम ए अर्थशास्त्र आदि द्वारा अपने शोध पत्रों का वाचन किया गया। अंत में प्रश्नोत्तरी के माध्यम से प्रतिभागियों की जिज्ञासाओं का समाधान तकनीकी सत्र के विषय विशेषज्ञों द्वारा किया गया।दोनों सत्रों का संचालन संयुक्त रूप से प्रो रचना राजोरा एवं डॉ चंचल जैन द्वारा किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में विभिन्न महाविद्यालय से पधारे अनेक प्राध्यापक, पूर्व प्राध्यापक एवं शोधार्थी सम्मिलित हुवे।