राहुल सिसोदिया की रिपोर्ट:–
नीमच/जावद (संवाददाता)
मोरवन और आसपास के क्षेत्र में चरनोई भूमि पर एक कपड़ा फैक्ट्री (सुविधा रियोन्स) के निर्माण को लेकर चल रहे विवाद में किसानों और ग्रामीणों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बड़ी जीत मिली है। माननीय इंदौर हाई कोर्ट ने इस निर्माण कार्य पर तत्काल प्रभाव से स्टे (Stay) लगा दिया है। ग्रामीणों ने इस फैसले को ‘सत्य और न्याय की जीत’ बताया है।
चरनोई भूमि पर कब्जे का प्रयास विफल
कपड़ा मिल की बाउंड्री से सटी यह भूमि पिछले कई वर्षों से गौमाता के चरने का स्थल रही है। ग्रामीणों और किसान संगठनों के लंबे विरोध और संघर्ष के बाद कोर्ट ने यह स्टे देकर मनमानी पर विराम लगाया है। किसान नेता पुरण अहीर का कहना है कि यह फैसला न केवल उनके अधिकारों की रक्षा करता है, बल्कि यह भी स्थापित करता है कि जनता के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
प्रशासन पर झूठे केस दर्ज करने का आरोप
किसान नेता पूरणमल अहीर के दौरान किसानों और महिलाओं पर दर्ज हुए झूठे प्रकरणों को लेकर ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने स्थानीय प्रशासनिक अधिकारियों, विशेषकर एसडीएम जावद प्रीति सिंधी (नाहर/जैन), पर जानबूझकर झूठे केस दर्ज कराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों ने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि जिन लोगों पर मामले दर्ज हुए, उनमें से कई घटना के दिन मौके पर मौजूद ही नहीं थे, बल्कि गांव में ही थे। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
प्रदर्शन को हिंसक दिखाने की साजिश
यह भी आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र के किसानों और युवाओं द्वारा चलाए जा रहे शांतिपूर्ण धरने को बदनाम करने के लिए षड्यंत्र रचा गया। आरोप है कि ओमप्रकाश सकलेचा के करीबी लोगों द्वारा महिलाओं और बच्चों से पत्थराव कराया गया, ताकि आंदोलन को हिंसक रूप देकर समाप्त किया जा सके। इस मामले की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
राजनीति और ‘रोजगार-विरोधी’ दुष्प्रचार
किसानों ने आरोप लगाया कि जब वे शांतिपूर्वक ज्ञापन देने गए, तो उन्हें जातिगत राजनीति के तहत जानबूझकर रोका गया, जिससे हंगामे की स्थिति बनी। इसके अलावा, उन्होंने 2023 विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री के नीमच दौरे का हवाला देते हुए स्थानीय नेताओं पर झूठा प्रचार करने का आरोप लगाया। नेताओं ने दावा किया था कि जावद में 500 उद्योग लगाए गए है, जबकि पिछले 22 वर्षों में एक भी स्थापित नहीं हुआ। किसान नेता पूरण अहीर ने कहा कि चरनोई भूमि पर कब्जा करने की नीयत से परियोजना को आगे बढ़ाया गया और विरोध करने वालों को ‘रोजगार-विरोधी’ कहकर बदनाम किया गया।
