पुराण मल अहीर ने प्रेसवार्ता में टेक्सटाइल फैक्ट्री के मामले में विधायक सखलेचा पर साधे सीधे आरोप पढ़े पूरी खबर।

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 गोचर भूमि पर अवैध टैक्सटाइल फैक्ट्री निर्माण,विधायक की तानाशाही, शांतिपूर्ण आंदोलन पर प्रशासनिक दबाव।

जावद। जावद के समीन मोरवन में टेक्सटाइल फैक्ट्री के विरोध सोमवार को पुराण मल अहीर द्वारा प्रेसवार्ता रखी गई। जिस पुराण मल अहीर द्वारा साफ कहा गए कि हम फैक्ट्री का विरोध नहीं कर रहे है। हम स्थान का विरोध कर रहे है जहां फैक्ट्री लगने है। वही प्रशासन द्वारा जनता पर झूठा मुकदमा बनाया गया। ग्रामवासी केवल अपनी जल–भूमि और पर्यावरण की रक्षा के लिए शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। वहीं पुलिस ने दबाव बनाकर उन्हें अपराधी साबित करने की कोशिश की। वही ग्रामीणों का कहां हे कि टेक्सटाइल फैक्ट्री को मोरवन में न खोल कर कही ओर खोला जाए। जिस के विरोध में लगातार धरना प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।वही ग्राम जावद के पास टेक्सटाइल मिल लगाने का कार्य प्रारंभ किया गया है, जो पानी के स्रोत से मात्र 50 मीटर की दूरी पर है। यह भूमि गोचर (चरागाह) भूमि है। पास में सेकेंडरी स्कूल, बालक-बालिका छात्रावास, ग्राम पंचायत कार्यालय, वन विभाग कार्यालय, गौशाला तथा पेयजल की टंकी (30 मीटर दूरी पर) स्थित हैं। यह सब मिलकर इस स्थान को औद्योगिक गतिविधियों के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त बताई जा रही हैं। वही इस बांध से जावद नगर पंचायत की लगभग 25,000 की आबादी और सरवनिया की 12,000 की आबादी को पेयजल मिलता है। इसके अलावा 30 से अधिक गांवों के खेतों को भी सिंचाई के लिए यह पानी जाता है।

टेक्सटाइल प्रोसेसिंग के दुष्परिणाम :

कपड़ा प्रोसेसिंग में प्रति मीटर कपड़े पर लगभग 50 से 150 लीटर पानी लगता है। यह जलराशि रासायनिक पदार्थों के साथ भूमि और भूजल दोनों को प्रदूषित करती है। जनता चाहें तो इस विषय पर Google या GPT पर अन्य क्षेत्रों के उदाहरण देख सकती है – जहाँ कपड़ा उद्योग के प्रदूषण से गंभीर हानि हुई हैं।

तारीख की घटना (शांतिपूर्ण आंदोलन पर दमन):

दिनांक 3 तारीख को किसान अपने साधनों से शांतिपूर्ण तरीके से कलेक्टर कार्यालय ज्ञापन देने जा रहे थे। लेकिन जावद SDM और TI जितेंद्र कुमार वर्मा ने जानबूझकर रास्ते में दो-तीन स्थानों पर रोकने का प्रयास किया, ताकि किसान आगे न बढ़ सकें। फिर भी किसान अनुशासन और संयम से आगे बढ़े। जब किसान फोर लेन रोड पर पहुंचे, पुलिस ने ट्रैक्टरों को रोककर रास्ता लगभग डेढ़ घंटे तक जाम करवा दिया। यह जाम पुलिस की गलती से हुआ, पर बाद में उसी को आधार बनाकर किसानों पर मुकदमे दर्ज कर दिए गए। यह साफ दिखाता है कि शांतिप्रिय आंदोलन को जानबूझकर बदनाम करने की साजिश रची गई।

राजनीतिक हस्तक्षेप और पत्थरबाज़ी की साज़िश

 पूरणमल अहीर ने विधायक से जुड़े लोगों ने जानबूझकर पत्थरबाज़ी करने का आरोप लगते हुए । शांतिपूर्ण धरने को हिंसक दिखाया जा सके। इस तरह प्रशासन को बहाना मिल गया कि वह निर्दोष किसानों पर कारवाही कर सके। ताकि जनता के डर के माहौल में फैक्ट्री का काम दोबारा चालू कराया जा सके।

विधायक पर लगाए तानाशाही का आरोप, जनता की अवहेलना और भूमि-घोटाले का हो खुलासा

   विधायक ने 25 दिनों तक धरने पर बैठे लोगों से बात तक नहीं की, और जब लगभग एक महीने बाद मीडिया के सामने सफाई दी तो उनकी बातों से स्पष्ट हुआ कि वे आम जनता को अपने बराबर नहीं मानते। जनता ने केवल अपने जल, भूमि और पर्यावरण की सुरक्षा की मांग की थी और इन मांगों को दबाकर तथा लोगों को बदनाम कर के फैक्ट्री का काम फिर से चालू करवाने की यह चाल हम स्वीकार नहीं करेंगे।

वही स्थानीय लोगों के अनुसार, फैक्ट्री की सीमा निर्माण हेतु डैम के पास से लगभग 5,000 ट्रॉली पत्थर बिना किसी विधिक अनुमति या रॉयल्टी अदा किए खोदे और हटाए गए। आरोप है कि ये पत्थर सीधे मिल की बाउंड्री निर्माण में उपयोग किए गए। हैरानी की बात यह है कि इस संबंध में आज तक कोई उचित प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई, बल्कि उल्टा गाँववालों पर झूठे मुकदमों का सिलसिला चला। जिस की शिकायत कलेक्टर कार्यालय में भी की गई। 1 माह बीत जाने पर भी कोई कारवाही नहीं हुई।

 विधायक सखलेच पर भूमि हेराफेरी और मंदिर की भूमि पर कब्ज़ा करने का लगाया आरोप

विधायक ने मंदिर की लगभग 100 बीघा भूमि पर अवैध कब्ज़ा कर रखा है उन्होंने मुरली मनोहर जी जोशी को बुलाकर, उनकी आड़ में आसन दरियानाथ मठ की भूमि पर हनुमान जी की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करवाई। धर्म के नाम पर भूमि पर कब्ज़ा करने के बाद, रिकॉर्ड में हेराफेरी कर अपनी पत्नी, बेटे और बहू के नाम से फर्जी नामांतरण करवा लिया गया। धर्मानुसार जहाँ प्राण प्रतिष्ठा होती है वहाँ प्रतिदिन पूजा-आरती होना आवश्यक है, परंतु वहाँ कई वर्षों से पूजा-अर्चना नहीं होती – यह दर्शाता है कि धार्मिक आड़ में भूमि कब्ज़े का वास्तविक उद्देश्य था।

 जब इस विषय में जनता से बात करी गई तो जनता का उद्देश्य स्पष्ट उद्योग का नहीं, स्थान का विरोध बताया।वही जनता उद्योग या रोज़गार का विरोध नहीं कर रही, बल्कि केवल उस स्थान का विरोध कर रही है जहाँ फैक्ट्री लगाई जा रही हैं- जो जल स्रोत और गोचर भूमि के निकट है।

वही प्रशासन और विधायक इस मामले में कोई साफ बात करते हुए नजर नहीं रहे है। क्या जनता को इंसाफ मिलेगा। या विधायक का तन शाह शासन चलेगा। वही ऐसा ही माहौल रहा तो आने वाले विधानसभा के चुनाव में इस का अच्छा खास असर देखने को मिलेगा।

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